कारोबारियों को मोदी सरकार का बड़ा तोहफा: GST अफसरों से छीना गिरफ्तारी का अधिकार, ₹10 हजार तक नोटिस नहीं, ₹5 करोड़ तक क्रिमिनल केस से छूट!
नई दिल्ली (The Jagran News):
जीएसटी (GST) व्यवस्था लागू होने के करीब 9 साल बाद केंद्र सरकार ने 'इंस्पेक्टर राज' और टैक्स उत्पीड़न पर लगाम लगाने के लिए ऐतिहासिक फैसले लिए हैं। जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक में कारोबार को आसान (Ease of Doing Business) बनाने के उद्देश्य से टैक्स अफसरों के हाथ से सीधे गिरफ्तारी का अधिकार छीन लिया गया है। पहले सीजीएसटी एक्ट की धारा 69 के तहत अधिकारी मनमाने तरीके से कारोबारियों को गिरफ्तार कर लेते थे, लेकिन अब कोर्ट की मंजूरी अनिवार्य होगी।
काउंसिल के नए फैसलों के तहत छोटे व्यापारियों को बड़ी राहत देते हुए शो-कॉज नोटिस की सीमा ₹1,000 से सीधे बढ़ाकर ₹10,000 कर दी गई है। यानी अब ₹10,000 तक की टैक्स देनदारी या कथित चोरी पर विभाग कोई नोटिस जारी नहीं करेगा। इसके अलावा टैक्स चोरी से जुड़े आपराधिक (क्रिमिनल) केस दर्ज करने की न्यूनतम सीमा ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ कर दी गई है। इसका साफ मतलब है कि ₹5 करोड़ तक के मामलों में व्यापारियों पर आपराधिक मुकदमा नहीं चलेगा।
काउंसिल के अन्य प्रमुख राहत भरे फैसले:
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लेट फीस में भारी कटौती: जीएसटी रिटर्न देरी से भरने पर लगने वाली न्यूनतम पेनल्टी ₹25,000 से घटाकर ₹10,000 कर दी गई है।
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ई-कॉमर्स पर टैक्स राहत: अनरजिस्टर्ड व्यक्ति द्वारा ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से सामान डिलीवर करने पर जीएसटी 18% से घटाकर मात्र 5% लगेगा।
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ट्रांजिट में गाड़ियों की बेवजह जांच बंद: माल वाहनों की चेकिंग अब केवल वहीं होगी जहां से माल चला है या जहां पहुंचना है; बीच के राज्यों में बेवजह तंग नहीं किया जाएगा।
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ग्रुप इंश्योरेंस पर ITC: कर्मचारियों को ग्रुप इंश्योरेंस देने वाली कंपनियों को अब इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का फायदा मिलेगा।
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ऑटोमैटिक रिफंड: जीएसटी इलेक्ट्रॉनिक कैश लेजर में जमा अतिरिक्त पैसा अब व्यापारियों को बिना सरकारी दखल के अपने आप वापस मिलेगा।